दोपहर में रहा जमकर लू का असर, सडकों पर सन्नाटा पसरा तापमान 42.4, फिर भी चमडी पर चिरमिराहट -अगले 2-4 दिनों में बदलेगा का मौसम का मिजाज

 

उज्जैन । तापमान के तेवर 42.4 डिग्री होने पर भी उज्जैन में आम आदमी ने रविवार को अपनी चमडी पर चिरमिराहट महसूस की है। दोपहर में जमकर लू का असर देखा गया है। गर्म हवाओं के थपेडों से बचने के लिए आम आदमी भी घरों में कुलर एवं पंखे की हल्की गर्म हवाएं खाता रहा। पशु भी इस दौरान ठंडे स्थलों पर दुबके रहे। अगले 2-4 दिन में मौसम का मिजाज बदल सकता है।

सूरज के तेवर तीखे होते जा रहे हैं। सुबह के समय ही धूप चुभने वाली रहने लगी है। पूर्वान्ह होते –होते तो तपन से आम आदमी के पसीने से बूरे हाल हो जाते हैं। दोपहर में तो सडकों पर सन्नाटे की स्थिति देखी जा सकती है। मुख्य सडकों पर तो फिर भी इक्का-दुक्का वाहन मिल जाते हैं लेकिन आवासीय क्षेत्र में सन्नाटा पसर रहा है। इधर देर रात तक जागरण की स्थिति भी बन रही है।

बदलेगा मौसम का मिजाज-

भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में 50 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। महाराष्ट्र में भी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली कड़कने की उम्मीद है।

पारा 42.4 एवं 25 पर –

शासकीय जीवाजी वेधशाला से जारी विज्ञप्ति के अनुसार रविवार को शहर में न्यूनतम तापमान 25 डिग्री एवं अधिकतम तापमान 42.4 डिग्री सेंटी ग्रेड रहा है। आर्द्रता सुबह 50 एवं शाम को 19 प्रतिशत दर्ज की गई । सुबह 2 किलोमीटर प्रति घंटे से चल रही हवाओं ने शाम होते होते 8 किलोमीटर की रफ्तार पकड ली थी।

इस बार सामान्य से कम बारिश संभावित-

इधर देश भर से सामने आ रही खबरों के अनुसार इस बार सामान्य से कम बारिश संभावित बताया जा रहा है। इसके पीछे अल नीनो का प्रभाव कारण बनने की बात कही जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस साल के मानसून के लिए अल नीनो के प्रभाव की भविष्यवाणी की है। इसका मतलब है कि बारिश सामान्य से कम होने की संभावना है। जून से सितंबर तक की कुल बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) के 90% से 95% के बीच रहने का अनुमान है। यदि बारिश LPA के 90-95% के बीच होती है, तो इसे सामान्य से कम माना जाता है। इससे पहले 2018 में भी बारिश सामान्य के मुकाबले केवल 91% हुई थी।

एलपीए (LPA) क्या है?

एलपीए यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज। यह पिछले 50 वर्षों की औसत बारिश है, जिसका उपयोग मानसून की स्थिति को मापने के लिए किया जाता है।

प्राकृतिक संकेत अच्छी बारिश के –

मौसम विज्ञान के विपरित प्राकृतिक संकेतों में अच्छी बारिश बताई जा रही है। कृषकों के अनुसार अगर खेत के उंचाई वाले क्षेत्र में टिटहरी अंडे देती है तो वह अच्छी बारिश का संकेत होता है। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में टिटहरी के अंडे उंचाई वाली जमीनों पर ही देखने की बात ग्रामीण बता रहे हैं। इसके साथ ही कृषकों का कहना है कि टिटहरी अगर दिन निकलने के बाद बोले तो मानसून लेटआता है और अगर सूर्योदय के समय में बोले तो मानसून समय पर आता है। ऐसे मे टिटहरी समय पर ही बोल रही है।

पश्चिमी विक्षोभ बेअसर-

एक बार फिर पिछले तीन दिनों से दिन के तापमान में तेजी दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने पर तापमान में तेजी आ रही है। शाम के समय में हवा की गति भी तेज हो सकती है। जिसके चलते देर शाम को भी गर्म हवा महसूस हो सकती है। जिस तरह से तापमान में तेजी आ रही है उसे देखते हुए आगामी दिनों में एक बार फिर मौसम करवट बदलेगा और आसमान में बादलों के साथ प्रदेश के कई जिलों में बारिश के साथ आंधी चलेगी। मई माह इसी तरह तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच गुजर सकता है।

 

 

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